स्मार्ट गैजेट से गर्त में समा रहा बचपन, 12 साल से कम उम्र के बच्चे भी देख रहे आपत्तिजनक कंटेंट

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। शिक्षा से लेकर मनोरंजन तक सब कुछ डिजिटल होने के साथ, स्मार्ट डिवाइस आज बच्चों के लिए एक जरूरी उपकरण बन गए हैं। चाहे होमवर्क करना हो, अपने दोस्तों या परिवार के साथ चैट करना हो या पढ़ाई के लिए ऐप्स का उपयोग करना हो आज की डिजिटल दुनिया में बच्चे फोन का बेहिसाब इस्तेमाल करते हैं और धीरे-धीरे उनकी लत बढ़ती जा रही है।

वाईफाई पर चल रहे ट्रैफिक पर नजर रखने वाले उपकरण हैप्पीनेट्ज ने एक सर्वेक्षण जारी कर इसकी जानकारी दी है। यह सर्वेक्षण 1,500 अभिभावकों के बीच किया गया। इसमें पाया गया है कि 12 वर्ष से कम उम्र के कम से कम 42 प्रतिशत बच्चे प्रतिदिन औसतन दो से चार घंटे तक अपने स्मार्टफोन या टैबलेट से चिपके रहते हैं।

स्क्रीन समय नियंत्रित कर पाना चुनौती

सर्वेक्षण के अनुसार अभिभावकों के लिए अपने बच्चों के स्क्रीन पर बिताने वाले वक्त को नियंत्रित करना और उन्हें आपत्तिजनक सामग्री देखने से रोकना एक चुनौती है। बच्चों के पास अपने टैबलेट या स्मार्टफोन हैं जिससे वह इंटरनेट पर बिना किसी रोकटोक के कुछ भी देख सकते हैं।

स्मार्ट उपकरण से रख सकते हैं नजर

बाजार में ऐसे उपकरण भी मिलने लगे हैं जो वेबसाइटों और एप्स पर नजर रख सकते हैं। ऐसे उपकरण को इंस्टाल कर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हानिकारक वयस्क साइटें और एप्स स्थायी रूप से अवरुद्ध हों। हैप्पीनेट्ज की सह-संस्थापक और सीईओ ऋचा सिंह ने बताया कि हैप्पीनेट्ज पैरेंटल कंट्रोल फिल्टर (पीसीएफ) बॉक्स के जरिये इसी तरह की सेवाएं प्रदान करता है।

मनोरंजन के लिए भी स्मार्टफोन जरूरी

12 वर्ष से कम उम्र के 42% बच्चे रोज चार घंटे स्मार्टफोन करते हैं यूज 69 प्रतिशत बच्चों के पास हैं खुद के टैबलेट या स्मार्टफोन 74 प्रतिशत बच्चे यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं  61 प्रतिशत बच्चे आकर्षित हैं गेमिंग की ओर

गैजेट की लत के परिणाम

गैजेट के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर बच्चों का नखरे दिखाना या आक्रामक हो जाना आम बात है। इसके अलावा बेचैनी, चिड़चिड़ापन, सामाजिक मेलजोल में कमी, एकाग्रता और ध्यान की कमी को गैजेट की लत के प्रमुख लक्षण के रूप में देखा जा सकता है।

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Posted By Narender Sanwariya

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