Janjgir Champa:बापू की कुटिया विरान, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

जांजगीर – चांपा । घर के बाहर बुजुर्गों को एक ऐसी जगह मिल सके जहां वे अपना दिल बहला सकेंगे, दिल खोलकर एक – दूसरे से अपनी बात कह सके और शतरंज कैरम खेलकर मनोरंजन कर सके इसके लिए जिला मुख्यालय जांजगीर के भीमा तालाब के पास और बीडीएम गार्डन में ‘बापू की कुटिया’ का निर्माण कराया गया है। लोकार्पण के तीन साल बाद भीमा तालाब के पास बनी कुटिया विरान पड़ा हुआ है। वहीं सालभर से बीडीएम गार्डन की कुटिया में ताला लटक रहा है। ऐसे में यहां आने वाले बुजुर्गों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

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लोक निर्माण विभाग के द्वारा दस – दस लाख की लागत से जिला मुख्यालय जांजगीर के भीमा तालाब के पास और बीडीएम गार्डन में ‘बापू की कुटिया’ का निर्माण कराया गया है। तालाब केपास निर्मित बापू की कुटिया का तीन साल पहले 6 जनवरी 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नेलोकार्पण किए थे। लोकार्पण के बाद कुटिया में रखे कैरम में सीएम भूपेश बघेल , विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने हाथ आजमाए थे।

लोकार्पण के बाद कुछ दिनों तक कुटिया को खोला गया । वहीं अब बुजुर्गों के मनोरंजन के लिए रखे गए कैरम बोर्ड में धूल की परतें जम गई। वहीं अब कुटिया से कैरम ही गायब हो गया है। अब यहां ताला लटक रहा है। ठीक इसी तरह बीडीएम गार्डन जांजगीर में बापू की कुटिया नाम से बुजुर्गों के लिए मनोरंजन का केंद्र का निर्माण कराया गया है। कुटिया में बुजुर्गों के लिए अनेक प्रकार के मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराने की योजना थी मगर कुटिया बन जाने और लोकार्पण हो जाने के सालभर बाद भी नगर पालिका द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बीडीएम गार्डन बनी बापू की कुटिया का विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत के हाथों लोकार्पण कराया गया है। इसके बाद यहां सुविधा और संसाधन उपलब्ध कराने नगर पालिका द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। जबकि गार्डन के सुंदरीकरण के नाम पर लाखों रूपये खर्च कर दिए गए हैं। इसके कारण सुबह शाम गार्डन में आने वाले बुजुर्गों को बापू की कुटिया का लाभ नहीं मिल रहा है। लोकार्पण के बाद से यहांभी ताला लटक रहा है। ऐसे में दस दस लाख रूपये की लागत से बने बापू की दोनों कुटिया विरान पड़ी हुई है।

ये सुविधाएं देनी थी बुजुर्गों को

बापू की कुटिया में बुजुर्गों के लिए एलईडी टीवी, समाचार पत्र, रेडियो, आराम दायक कुर्सी, शतरंज, कैरम आदि की सुविधा देनी थी। इस कुटिया को सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटे बुजुर्गों के लिए खोलना था। बाकी समय यहां योगा, आर्ट, ड्राइंग, डांस, पेंटिंग आदि क्लासेस, संगोष्ठी, सम्मान समारोह आदि कराने थे, लेकिन नगर पालिका और समाज कल्याण विभाग की लचर व्यवस्था से बापू की कुटिया दम तोड़ रही है।

परिवार के सदस्यों के नाम पर कर सकते हैं दान

बापू की कुटिया के लिए अपने परिवार या किसी सदस्य के नाम पर कोई भी समाज सेवी सामग्री दान कर सकते हैं। फर्नीचर, टीवी, खेल सामग्री, दूसरी उपयोगी चीजें भेंट कर सकते हैं। इससे सामाजिक स्तर पर लोगों का जुड़ाव होगा। वहीं यहां आने वाले बुजुर्गो का मनोरंजन हो सकेगा।

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Posted By Yogeshwar Sharma

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