OMG 2: वर्जित विषय और मनोरंजन का कॉम्बो है ओएमजी-2 | OMG 2 review movie of combo of taboo subject and entertainment

OMG 2: सेंसर बोर्ड ने ओएमजी 2 में जो 27 कट लगाने का आदेश दिया था, उससे ऐसा लग रहा था कि इतने कम समय में मूवी कैसे रिलीज की तारीख तक तैयार हो पाएगी। कैसे महादेव का रोल कर रहे अक्षय कुमार नंदी के रोल में ढाले जाएंगे, पता नहीं कितने सीन की दोबारा शूटिंग और डबिंग करनी पड़ेगी। लेकिन ओह माई गॉड 2 के निर्देशक अमित राय ने तय समय सीमा में ना केवल सारे कट्स लगा दिए बल्कि फिल्म को ऐसी बांधने वाली बनाया है कि आप समझ ही नहीं पाते कि इस मूवी में से कुछ कटा भी है, क्योंकि कुछ भी ‘मिसिंग’ नहीं लगता। यूं भी अरसे बाद ऐसी कोई फिल्म आती है, जो एकदम नया विचार लेकर आई हो, और उस विचार को एंटरटेनमेंट की चाशनी में डुबोकर देखने लायक भी बना दे।

OMG 2 को देखकर मूवी की रिलीज से पहले विरोध करने वाले मूवी देखकर सोचेंगे जरूर कि विरोध करें या छोड़ दें। हालांकि सोचेंगे वो समर्थन करने पर भी। इस मूवी में किशोरवय बच्चों से जुड़ा एक वर्जित विषय उठाया गया है, वो भी सारे मसालों के साथ। महाकाल के आशीर्वाद और अवतार के साथ। इसीलिए बड़ी हिम्मत तो चाहिए थी कि इस विषय पर मूवी बनाएं और महादेव, महाकाल मंदिर, उनके पुजारी सबको शामिल करने का साहस दिखाएं। लेकिन अमित राय ने ना केवल ऐसा किया बल्कि ऐसे सीन रचे कि मूवी प्रिव्यू के दौरान लोगों ने ठहाके भी लगाए और तालियां भी बजाईं।

आपत्ति उठाना हालांकि अभी भी मुमकिन है। पहला सीन ही नागा बाबाओं के जुलूस से शुरू होता है। ‘उज्जैन’ शब्द भले ही पूरी मूवी से हटा दिया गया है, वो सीन भी हटा दिया गया है, जिसमें अक्षय कुमार महाकाल मंदिर के शिखर पर खड़े दिखाए गए हैं, लेकिन प्लेटफॉर्म पर नहाने वाले सीन को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है, बल्कि इस तरह एडिट कर दिया गया है कि पता ना चले कि पानी की धार कहां से आ रही है और अक्षय कहां पर बैठे हैं। लेकिन महाकाल की नगरी, महाकाल का मंदिर, भस्म आरती, वहां के इलाके आदि तो सब हैं ही, लोग तो समझ ही जायेंगे।

लेकिन 80 फीसदी मूवी में महाकाल मंदिर के महंत को खलनायक की तरह दिखाना और बाकी 20 फीसदी में उनके हृदय परिवर्तन के बाद उनके साले को खलनायक की तरह दिखाना वो भी उन्हीं की बच्ची के यौन शोषण के आरोप में, महाकाल के पुजारियों को नागवार भी गुजर सकता है। इसी तरह शैव में तमाम मत हैं, उनमें से कुछ य़े भी मानते हैं शिवलिंग की जो अवधारणा है उसे पुरुष के जननांग से जोड़कर देखना ठीक नहीं। लेकिन मूवी के एक डायलॉग में उसका वैसे ही जिक्र किया गया है, सो उस पर कल को कोई आपत्ति दर्ज करवा सकता है।

हालांकि महादेव के अवतार की मूवी है, पूरी मूवी में कोशिश यही की गई है कि महाकाल की महिमा में कोई कमी ना आए। इसको ऐसे भी देखा जा सकता है कि नई पीढी की समस्याओं का हल भी महादेव के पास है। उनके बीच भी इस मूवी के साथ साथ महाकाल का क्रेज बढ़ना तय मानिए। महादेव का सुपर कार चलाना, फंकी मस्तमौला लुक में दिखना उनके बीच चर्चा का विषय बन सकता है। लेकिन एक सीन में शराब को प्रसाद की तरह पीना, भले ही कालभैरव पर शराब का प्रसाद की तरह चढ़ाने का जिक्र है, लेकिन बुरा लगने वाले को कुछ भी बुरा लग सकता है।

कहानी है पंकज त्रिपाठी के बेटे की

कहानी के केन्द्र में है महाकाल परिसर में दुकान लगाने वाले महाकाल भक्त कांतिशरण मुदगल (पंकज त्रिपाठी) के किशोर उम्र बेटे विवेक (आयुष) की, जिसको उसके साथी लड़के उसके निजी अंगों को लेकर गलत जानकारी देकर हीनभावना से भर देते हैं। उसको लगता है कि केवल उसके अंदर ही कमी है। नतीजा ये कि वो जापानी तेल से लेकर वियाग्रा तक सब आजमाता है और एक दिन हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ता है, तब पिता को पता चलता है।

इधर उसका स्कूल के बाथरूम का एक निजी वीडियो साथी लड़कों के द्वारा शूट करके वायरल कर दिया जाता है। विवेक का पिता कांतिशरण मुदगल (पंकज त्रिपाठी) महाकाल का परम भक्त है। उसकी पुकार पर महादेव नंदी (अक्षय कुमार) को उसकी सहायता के लिए संन्यासी के वेश में भेजते हैं जो बेटे को आत्महत्या करने से बचाते हैं और मानहानि का केस लड़ने का सुझाव देते हैं। ऐसा इसलिए ताकि जिस स्कूल ने बेटे को निकाला, मेडिकल स्टोर वाला, जापानी तेल बेचने वाला, डॉक्टर आदि उससे माफी मांगे, तभी बेटे को लगेगा कि उससे कोई गलती नहीं हुई है, और वो अपराध बोध से बाहर आ पाएगा।

बेटे के स्वाभिमान की खातिर कांतिलाल कोर्ट जाते हैं। सामने तेजतर्रार वकील कामिनी (यामी गौतम) होती हैं। तमाम मुश्किलें और प्रलोभन कांतिलाल के रास्ते में आते हैं, लेकिन वो डिगते नहीं। रास्ता महाकाल दिखाते हैं। कोर्ट का एक-एक सीन कायदे से लिखा गया है। एक-एक हिंदू धर्म ग्रंथ जहां काम या यौन शिक्षा की बात है, उन सबकी चर्चा होती है। कामसूत्र से लेकर खजुराहो में चित्रित आसनों तक का उल्लेख आता है। गवाहों से अश्लील लगने वाले सवाल होते हैं। कोर्ट के सींस में तमाम ठहाके लगाने वाले मौके भी आते हैं।

कई सीन ज्यादा ही पारम्परिक लगने वाले लोगों को अखर भी सकते हैं। जैसे पंकज त्रिपाठी की किशोर बेटी का अपने भाई के वीडियो पर सेक्स के बारे में व्याख्यात्मक अंदाज में बताना या फिर पंकज त्रिपाठी का सेक्स वर्कर से खजुराहो के आसनों को दिखाकर ये पूछना कि आप क्या क्या आसन कर लेती हो।

हालांकि अब ये बहस हो सकती है कि इस मूवी को बनाने का असल मकसद आखिर क्या है? क्या वह नौजवान पीढ़ी में यौनशिक्षा का प्रसार करना है? अगर हां, तो फिर उसे ओएमजी-2 नाम देने तथा महादेव के नंदी को घुसाने की क्या जरूरत थी? बहरहाल अब फिल्म सिनेमाघरों में है। देखनेवाले ही तय करेंगे कि वो मूवी को किस रूप में देखते हैं। जहां तक अभिनय की बात है तो अक्षय कुमार, पंकज त्रिपाठी, पवन मल्होत्रा तथा यामी गौतम सबके साथ न्याय हुआ है सिवाय अरुण गोविल के। रामायण के राम को मिला विलेन जैसा रोल भी व्यर्थ ही चला गया है।

फिल्म के लेखक और निर्देशक अमित राय ने बड़ी चतुराई से इस फिल्म को न सिर्फ बाजार में चलने लायक बनाया है बल्कि रिलीज से पहले चर्चा में भी ला दिया है। अमित राय इससे पहले परेश रावल के साथ ‘रोड टू संगम’ बनाकर चर्चा में आ चुके हैं। अमित ने ना केवल इस मूवी की साहसिक कहानी लिखी है, बल्कि एक टैबू सब्जेक्ट को बांधकर रखने वाले भी बनाया है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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