100 साल पहले बनी इस हवेली का निर्माण सिर्फ मनोरंजन के लिए किया गया था… आज है हेरिटेज होटल

नरेश पारीक/चूरू.थार के प्रवेश द्वार के नाम से मशहूर चूरू की अपनी कला और गगनचुंबी हवेलियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। पहली नजर में ही किसी को भी सम्मोहित करने वाली यहां की हवेलियां आज विदेशी फिल्मों की पहली पसंद हैं। यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि चूरू का कोई शाही इतिहास नहीं है। ये हवेलियाँ समृद्ध और समृद्ध जंगलों के घर थे, जो यहीं रहते थे। हवेलियों में पेंटिंग मालिक की जीवन शैली का चित्रण है, या उस समय के फैशन का चित्रण कार या ट्रेन में यात्रा करना है।

बेजोड स्टैपटी का नायब उदाहरण प्रस्तुत करता है इन हवेलियों पर उकेरे ये चित्र जैसे आज ही चित्रित किए गए हो। हवेलियों के दरवाज़े भी जटिल रूप से डिज़ाइन किए गए हैं और इन्हें निहारने में आप पूरा दिन बिता सकते हैं। ऐसी ही एक हवेली है मालजी का कमरा जिसका निर्माण सेठ मालचंद कोठारी ने अपने मनोरंजन के लिए सन 1925 में किया था। करीब 100 साल पुरानी इस हवेली के निर्माण में चूने का इस्तेमाल हुआ है, इसकी छत ढोले की है। इसमें इटैलियन आर्टिस्ट, फ़्लोरिडा पिक्चर्स और निर्मित अपने मूल में चार चांद लगाती है और आज देशी-विदेशी फ़्लोरिडा की पहली पसंद है। वर्तमान में इस हवेली में जिले का पहला हेरिटेज होटल संचालित हो रहा है जहां देशी और विदेशी टूरिस्ट लॉज का लॉज उठाया जा सकता है।

सेठ जी मनोरंजन के लिए यहाँ आये थे
गाइड लालसिंह कहते हैं कि इस हवेली का निर्माण सेठ मालाचंद कोठारी ने अपने मनोरंजन के लिए किया था। जहां वह अपने रॉयल यार,दोस्त के साथ समय बिताते थे। मालजी के कमरे के नाम से मशहूर इस हवेली के बीच में एक चौक और चारों ओर उसकी और दर्शक दीर्घा और उसके ऊपर की दर्शक दीर्घा के लिए एक छोटी सी गैलरी है। वर्तमान में यह हवेली सेल के बाद एक व्यावसायिक उपयोग में ली जा रही है, इस हवेली का नाम आज हवेली होटल मालाजी कर दिया गया है। जिसमें 12 कमरे वाला ऐसा एक हॉल और आगे एक गार्डन है।

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