बाथरुम में आउटफिट्स से पहली बार एक्ट्रेस ने की थी ऐसी शरारत, मासूमियत से वायरल वीडियो और…





मुंबई . क्रिस्टोफर की फिल्म ‘अजमेर 92’ (अजमेर 92) का टेलिकॉम सोमवार को रिलीज हो गया। टेलिकॉम से साफ है कि यह कहानी साल 1992 में सामने आई वह घटना सामने आई है, जिसमें 250 से ज्यादा गैर मुस्लिम बच्चों को ब्लैकमेल कर उनके पूर्वजों तक पहुंचाया गया था। इन लड़कियों में कई लड़कियां ऐसी होती हैं, जो मद्रासी होती हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, इस घटना को अंजाम देने वाले समूह का नेतृत्व फारुक और नफीस चिश्ती कर रहे थे, जो अमीर अहमद का प्रबंधन सामान्य वाले प्रतिष्ठित खादिम परिवार से तल्लुक धारण कर रहे थे। बताया जाता है कि उनका ग्रुप बैंगलॉन या फार्महाउस पर गर्ल्स गर्लफ्रैंड करता था और फिर उनकी नंगी तस्वीरें खींचकर उन्हें सार्क ओलेग कर उन्हें ब्लैकमेल करता था।

पतली परत तारांकित ने दिया संदेश

ग्रैफिक टेलिकॉम ने यूट्यूब पर इसके डिस लिस्टिंग में लिखा है, ”ग्रिप टेलिकॉम में रेप के होटल में कई नाबालिग लड़कियों की शहीद हुई कुशी को दिखाया गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर शान और उन्माद दिखाया गया था।” कहानी में बताया गया है कि पावरफुल लोगों द्वारा शादीशुदा लड़कियों को कैसे ब्लैकमेल किया जाता है। “अजमेर 92 महिलाओं के बीच में आरक्षण का भाव जगने, उन्हें शैल्स तोड़ने के लिए प्रेरित करने और निडरता के खिलाफ किसी भी तरह के अत्याचार के लिए बोलने के लिए प्रेरित करने की उम्मीद है।”

अजमेर 92′ के टेलीकॉम में क्या दिखाया गया है?

टेलिकॉम में लड़कियों के एक के बाद एक रेप, उनकी ब्लैकमेलिंग और उनकी मौत की खुशी जैसे पक्के तौर पर नष्ट कर दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि पुलिस प्रशासन और न्यायाधीश ने इस मामले को किस तरह से अंजाम देने की कोशिश की थी।





Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *