भोपाल समाचार: नई सुविधाओं से लैस हुआ जनजातीय संग्रहालय, जंगल का जायका संग मनोरंजन भी भरपूर

मप्र जनजातीय संग्रहालय में संग्रहालय को भा रही नई सुविधा। टूरिज्म जन पौराणिक कथाओं के साथ फिल्में देखना उठा रहे आनंद।

रवीन्द्र सोनी अपडेट किया गया: | शनिवार, 08 जुलाई 2023 02:51 अपराह्न (IST) प्रकाशित: | शनिवार, 08 जुलाई 2023 02:51 अपराह्न (IST)

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी की खूबसूरत श्यामला हिल्स पर बसा मप्र के जनजातीय संग्रहालयों की रोचक जानकारी तो अपने में शामिल करें। इसके वास्तुकार और इसकी दिलचस्प संरचना भी सीधे लोगों के दिल और दिमाग में छाई रहती है। यहां जो भी आता है वह अनेक रंगों में सरोबार प्रदेश का युवा संसार देखकर आनंदित हो जाता है। संपूर्ण जन जातीय परिदृश्य पर नज़र डाली जाती है तो एक इंद्रधनुषी अलौकिक नज़र आती है। हर जनजाति की जीवन शैली अलग-अलग है। उनका रहना-सहन, विविधता और पहनावा एक-दूसरे से जुड़ा है। तीज-त्योहार हों, पूजा-अनुष्ठान या फिर जन्म-मृत्यु और विवाह संस्कार, यहां स्वर्णिम परंपरा और इतिहास के दिव्य दर्शन होते हैं। नृत्य और गीत-संगीत से तो अपनी अलग पहचान सर्वविदित है। अब इस जनजातीय संग्रहालय में फिल्मों के माध्यम से नॉर्थवेस्ट के आसपास के जीवन को देखने-समझने का मौका भी मिल रहा है।

फिल्मों के साथ-साथ देशज स्टूडियो का जायका

संग्रहालय के संयोजन में एक बड़ी मशाल के माध्यम से जन जातीय समूह पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है, जिसे देखकर आप पर्यटक जन जातीय वृत्तचित्र का जायका लेने के साथ ही देख सकते हैं। कोटा के लोगों को यहां भील, गौंड और बागा समुदाय पर आधारित फिल्में ही दिखाई जा रही हैं। इन फिल्मों की अवधि अवधि से दो घंटे की होती है। जिसमें विशेष रूप से बैगा समुदाय के जीवन परिवेश पर बनी फिल्म मंडल के बोल… दिखाई दे रही है। जिसे इसी साल राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। इस फिल्म का निर्देशन भोपाल के ही रॉबर्ट जांगले ने किया है। उन्होंने ट्राइब पर बहुत काम किया है। वे प्रदेश की सभी सातों जनजातियों पर डॉक्यूमेंट्रीज़ की हैं। उन्हें छह राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उनकी ‘मंडल के बोल’ फिल्म को नाना फीचर फिल्म श्रेणी में 68वां राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। उन्होंने अनुमान लगाया और भी डॉक्युमेंट्री की हैं, जो चित्रित हैं। वहीं यहां मसालों को भील, गोंड, बेगा और कोरकू जनजातियों के व्यंजन के साथ दिए जा रहे हैं।

विदेशियों को भी संग्रहालय संग्रहालय कहते हैं

यह जनजातीय संग्रहालय हमेशा के लिए विदेशी मेहबानों के लिए दस्तावेज बना हुआ है। शहर में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन या यूनिसेफ के कार्यक्रम में शामिल होने वाले यहां सदस्य शामिल करना नहीं भूलते हैं। वे यहां पर रुकते हैं। देशज रामायण का आनंद लेने के साथ-साथ प्रदेश के जीवन में पर्यावरण से रू-ब-रू होते हैं।

इनका कहना है

मप्र की सराय के जीवन और संस्कृति को फिल्मों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। इसके साथ ही यहां आने वाले पर्यटक मानचित्र के सातों द्वीप के विशेष महलों का आश्रम ले सकते हैं।

– अशोक मिश्रा, क्यूरेटर, मप्र जनसैन्य संग्रहालय

के द्वारा प्रकाशित किया गया: रवीन्द्र सोनी

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